Wednesday, 22 February 2017

ज़िन्दगी है वही जो चलती है...





ज़िन्दगी है वही जो चलती है... 
कुछ पानी सा ये बहती है,
ये गिरके ही संभालती है... 
सुन ज़रा, कुछ कहती है, 
हर दर्द ये चुपके सहती है,
फिर भी चलती रहती है...

कबि अँधेरे मैं बिखरती है...
तो सुबह मैं कभी खिलती है..
है तलाश इसे मंज़िल की.... 
गिन  के मौसम ये बरसती है... 
रोक न खुद को तू... 
तूफ़ान मैं फाँसी कश्ती भी ये कहती है... 
के ज़िन्दगी है वही जो चलती रहती है... 

मौसम कई आते है... 
बरात नयी लाते हैं..
भीगा कर उसमे ये धो देती है.... 
ज़िन्दगी है वही जो चलती रहती है.... 

शायद ये जान कर हमें गम देती है.. 
की संभल जाये हम,
धीरे से इशारो मैं कहती है... 
कभी हालातों से मिलकर,
रूप नया रख लेती है... 
तो कभी कुछ कर के,
खुश हमें कर देती है... 
हर मोड़ पर ये,
इम्तेहान तो लेती है... 
हाँ ये ज़िन्दगी, 
ये ज़िन्दगी कुछ कहती है... 

Thursday, 16 February 2017

दुनिया मैं यूँ ही होता है...




जब जब दर्द का बादल छाया.....
जब गम का साया लहराया...
जब ये तनहा दिल घबराया..
जब साथ देने कोई न आया...
जब खुद को बीच तूफ़ान मैं पाया...
जब आंखों मैं आंसू भर आया...
हमने दिल को यूँ समझाया...
की आखिर दिल तू क्यों रोता है...
दुनिया में यूँ ही होता है...
ये दर्द है सब के हिस्से में आया...
इस गम ने सबका ही दिल सहलाया...
आंखे तेरी बेकार ही नम हैं...
देख हर पल एक नया मौसम है...
देख बस ये कुछ दिनों का गम है...
फिर तू क्यू इस ज़िद पर है आया...
तब हमने दिल को ये समझाया...
दिल आखिर तू क्यू रोता है...
दुनिया मैं यूँ ही होता है...